Highlights

विविध क्षेत्र

वर्ल्ड चैंपियन बनी निकहत जरीन, कट्टरवादी सोच के खिलाफ भरी अपने सपनों की उड़ान

  • 03 Jun 2022

निकहत जरीन इन दिनों यह नाम चर्चा में है। हो भी क्यों न, काम ही ऐसा किया है निकहत जरीन ने, कि हर कोई उनकी प्रशंसा कर रहा है। निकहत जरीन भारत की बेटी हैं, जिन्होंने महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है। निकहत की उपलब्धि बहुत बड़ी है। भारत के साथ साथ विश्व भर में उनकी प्रशंसा हो रही है। वह महिलाओं के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं। खासकर खेल, एथलीट के क्षेत्र में जाने का सपना देखने वाली महिलाओं के लिए। निकहत की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए निकहत और उनके परिवार ने समाज की बहुत बातें सुनी। आलोचनाओं का सामना किया। रूढ़ी और कट्टरवादी सोच के खिलाफ निकहत ने अपने सपनों की उड़ान भरी थी। निकहत का सफर आसान नहीं था। जीत के लिए उन्हें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तौर पर हर तरह से तैयार होना पड़ा। चलिए जानते हैं दुनिया भर में भारत का परचम लहराने वाली देश की बेटी निकहत जरीन के बारे में।
जीवन परिचय
निकहत का जन्म तेलंगाना के निजामाबाद में 14 जून 1996 को हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद जमील अहमद और मां का नाम परवीन सुल्ताना है। निकहत के परिवार में उनसे बड़ी दो बहनें और एक छोटी बहन है। चार बेटियों के पिता जमील अहमद सेल्समैन का काम करते हैं और मां गृहणी हैं। जमील अहमद खुद पूर्व फुटबॉलर और क्रिकेटर रह चुके हैं। निकहत ने कम उम्र में ही अपनी राह तलाश ली थी। महज 13 साल की उम्र में निकहत ने बॉक्सिंग की शुरुआत की।
शिक्षा और बॉक्सिंग
उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा निजामाबाद के निर्मला हृदय गर्ल्स हाई स्कूल से ही पूरी की। बाद में हैदराबाद के एवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इस बीच निकहत बॉक्सिंग भी सीखती रहीं। निकहत के चाचा शमशामुद्दीन एक बॉक्सिंग कोच हैं और उनका बेटा भी मुक्केबाज है। ऐसे में निकहत ने उनसे बॉक्सिंग सीखना शुरू किया। निकहत के पिता ने उसके सपने और बॉक्सिंग सीखने की ललक को कभी दबाया नहीं, बल्कि बेटी को प्रोत्साहित किया।
बॉक्सिंग करियर
ग्रेजुएशन के दौरान एवी कॉलेज से ही निकहत ने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत की। उन्हें पहली सफलता साल 2010 में मिली। 15 साल की निकहत ने नेशनल सब जूनियर मीट में शानदार प्रदर्शन किया।  उसके बाद साल 2011 में तुर्की में हुए महिला जूनियर यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में फ्लाई वेट में गोल्ड जीता। उस साल निकहत ने अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ महिला युवा और जूनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर बॉक्सिंग में अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया। निकहत ने बैंकॉक में हुए ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया। साल 2014 में नेशनल कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता। निकहत जरीन ने गुवाहाटी में हुए दूसरे इंडिया ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता।
संघर्ष
निकहत जरीन ने भले ही कम उम्र में बड़ी सफलता हासिल कर ली हो लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी ट्रेनिंग करने के साथ ही समाज का सामना भी करना पड़ा। उनपर हिजाब पहनने का दबाव डाला गया। उनके शॉर्ट्स पहनने पर आपत्ति जताई गई। मर्दों के साथ बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करने पर तरह तरह की बाते सुनने को मिलीं। लेकिन निकहत और उनका परिवार कट्टरवादी विचार धारा से लड़ता हुआ आगे बढ़ता गया और अपनी जीत की गूंज से सबको जवाब दिया। 
साभार अमर उजाला